नई दिल्ली : 14 octobar 011 ,
केंद्र की UPA सरकार जब से घोटालो में फशी है तब से उसको संघ की याद भुत आ रही है , कांग्रेस पार्टी का एक इतिहाश रहा है की जब कभी अपने बुरे कामो के लिए जनता का आक्रोश मिला तो अपने सत्ता में रहते जो भी कम किया उसके लिए संघ को जिमेदार बताने लगे |
आज अन्ना हजारे के साथ संघ का सयोजन कांग्रेस को रास नहीं आ रहा है आखिर आये भी तो कैसे, इशी लिए अन्ना को राजनीती का हिस्सा बताने लगे, तो कभी संघ का जासूस , कांग्रेस के प्रवक्ता और नेता भूल गए है की नेतिकता क्या होती है शायद इशी लिए कांग्रेस की माता सोनिया गाँधी ने पूर्ण रूप से अपने ऐसे नेताओ की मैदान में छोड़ दिया है जिनको बोलना तक नहीं आता , इसका पहला उद्धरण है रेणुका चौधरी जिन्हें ये तक नहीं पता की टी बी पर क्या बोलना है और क्या नहीं. वैसे भी जो लोग ये बोल रहे है की संघ का समर्थन अन्ना को या उनके आन्दोलन को था और ये एक बुरी या आपतिजनक बात है तो शायद के एक कांग्रेस की बड़ी ही शर्मनाक विचारधारा है जिस नेहरु और गाँधी के परिवार के होने का ये ढोंग करते है उन्ही नेहरु- गाँधी ने संघ के समर्थन में कहा था की संघ एक राष्ट्रवादी संघठन है जो राष्ट्रा के हित में काम कर रहा है है लोगो में चरित्र निर्माण का कार्य कर रहा है , ऐसे में कांग्रेस के दिग्गी राजा और युवराज , पि सी संघ को गलियां देतें है तो क्या ऐसे में वो उन महान लोगो का अपमान नहीं करतें , क्या संघ कोई अछूत बीमारी है , क्या संघ के लोग भारत के नागरिक नहीं है , क्या उनको अपनी बात रखने का अधिकार नहीं है , कांग्रेस के और नेते ऐसी अनुचित बात करतें है और देश के संविधान की अवहेलना करतें है क्या ? वो संघ और उनके लोगो के द्वारा दिए देश हित के बलिदान से अपनी कांग्रेस से चाप्लुश नेताओ से कर रहें है यदि ऐसा है तो दिग्गी जैसे नेताओ को गुलामी स्वीकार करनी होगी हम कल भी गोरो के गुलाम थे और आज भी गुलाम है.
कांग्रेस जिस राहुल गाँधी को संत बताती है ओर देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में दिखा रही है उनकी राजनीतिक समझ का पता इशी से चल जाता है की अन्ना के अनशन पर कुछ नहीं कर पाए ओर जब बोले तो अपने ज्ञान का परिचय दे दिया , राजनीती का मतलब उनके लिए शायद किसी गरीब के गृह पर रात बिताना , भोजन करना जैसे ढोंग है, लेकिन जनता सब समझ रही है |
By : Rakesh Kumar Pandey